विश्व सांस्कृतिक महोत्सव | The World Culture Festival

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आर्ट ऑफ लिविंग के 35 वर्ष पूरे होने पर विश्व सांस्कृतिक महोत्सव (WCF) का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में पूरे विश्व के विभिन्न संस्कृति के लोगों ने भाग लिया।

इस महोत्सव के लिए बनाए गए 7 एकड़ के मंच पर दुनिया भर के 37,000 से अधिक कलाकारों ने विविधता में एकता के संदेश को प्रतिध्वनित करते हुए अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया।

  • विविधता, प्रसन्‍नता और समग्र स्वीकार्यता के जश्न से भरे हुए 3 दिन
  • एक विश्व एक परिवार
  • 155 देश, 37 लाख लोगों की उपस्थिति, एक परिवार

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WCF Day 2 : /entry/world-culture-festival-sets-stage-for-inter-faith-convergence/

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भाषांतरित ट्वीट –

7 एकड़ में फैला हुआ दुनिया का सबसे बड़ा मंच जिसकी कोई नींव नहीं थी। क्या यह वास्तुकला का आश्चर्य था ?! या कोई रोमांच ?!


हमारे वेबकास्ट पार्टनर लाइवस्ट्रीम की रिपोर्ट के अनुसार विश्व सांस्कृतिक महोत्सव 188 देशों में 767,436 लोकेशन पर देखा गया।


विश्व के बहुत से महान विचारकों ने भावी संसार के लिए विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में अपने विचार प्रकट किए, उनमें से कुछ के विचार निम्नलिखित हैं :

विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में प्रमुख वक्ता – प्रथम दिवस

 

  • गुरुदेव श्री श्री रविशंकर, आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता – “आज हम संपूर्ण विश्व को एकात्मकता का सशक्त संदेश दे रहे हैं, इस समय संपूर्ण विश्व को इस संदेश की बहुत आवश्यकता है। आज हम यह संदेश दे रहे हैं कि हम सभी लोग अपने मतभेदों के बावजूद एक दूसरे के साथ रह सकते हैं, हम अपने मतभेदों के बावजूद एक दूसरे को प्रेम कर सकते हैं। विविधता हमारी धरती का स्वभाव है, तो हम सबको इस विविधता को प्रेम करना चाहिए। आइए अपने ज्ञान, संस्कृति, कला और समाज सेवा के माध्यम से शांति और सामंजस्य के संदेश को प्रसारित करें।”
  • श्री नरेंद्र मोदी, प्रधान मंत्री, भारत  – “यह इस अभियान (आर्ट ऑफ लिविंग) की ही शक्ति है जिसके आधार पर आज इतने सारे देशों के लोग एकता के सूत्र में बंधकर यहाँ उपस्थित हुए हैं।”
  • कमांडर.सर्वोत्तम राव, अध्‍यक्ष, व्यक्ति विकास केंद्र (वीवीकेआई) भारत, आर्ट ऑफ लिविंग  – “आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवक इस संगठन के सामाजिक कार्यों को समाज तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। सिर्फ भारत में ही हर साल लगभग 15,000 शिक्षक व लगभग 600,000 स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, और उनमें से कई अपने-अपने क्षेत्रों में परिवर्तन लाने में लगे हुए हैं।”
  • न्यायाधीश आर.सी.लाहोटी, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, भारत – “विश्व सांस्कृतिक महोत्सव विश्व संस्कृतियों का संगम है और मानव इतिहास के इस मोड़ पर इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।”
  • श्री हकुबन, शिमोमुरा, पूर्व मंत्री, शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय , जापान –  “हमारे प्रधान मंत्री शिंजो आबे ने मुझे एक संदेश देने के लिए कहा है। उनका संदेश है कि “मुझे पूरी आशा है कि हम आर्ट ऑफ लिविंग तथा परम पावन श्री श्री रविशंकर के माध्यम से विश्व शांति का प्रसार कर सकते हैं।”
  • शेख मोहम्मद बिन हमद अल शर्की, अल फ़ुजैरा, संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस – “आर्ट ऑफ़ लिविंग ने अपनी विविध परियोजनाओं के माध्यम से पिछले 35 वर्षों से दुनिया भर के व्यक्तियों और समुदायों को योग, श्वास लेने की तकनीक, नशामुक्ति अभियान के माध्यम से एक स्वस्थ और आध्यात्मिक जीवन के साथ सामंजस्य स्थापित करने का काम किया है।”
  • श्री मिशाले ए.एस. अधिन, उप-राष्ट्रपति, सूरीनाम  – “मुझे आशा है कि यह (विश्व सांस्कृतिक महोत्सव) हमें हमारी निम्न प्रकृति से ऊपर उठाकर हमारी व्यक्तिगत चेतना से ऊपर, व्यक्तियों के रूप में और राष्ट्रों की मदद करने की दिशा में एक प्रेरणास्रोत की भूमिका निभाएगा।”
  • श्री जुआन मैनुअल सैण्टोस, कोलंबिया के राष्ट्रपति – “श्री श्री रविशंकर और आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन, संघर्ष और हिंसा से पीड़ित इस विश्व में शांति के अग्रदूत हैं। वह हमें सिखाते हैं कि हमारे भीतर सुख और शांति का वास है और हमें अपने वास्तविक अस्तित्व में जीने के लिए केवल उनसे जुड़ने की आवश्यकता है।”
  • श्री कारु जयसूर्या, श्रीलंका संसद के सभापति – “आर्ट ऑफ लिविंग ने हजारों लोगों के दृष्टिकोण और जीवन को बदल दिया है। मैं मानव जाति की सेवा हेतु गुरुजी की अदम्य प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ।”
  • श्री एवगेनी कुयावेशेव, गवर्नर, सेवरडलोव्स्क क्षेत्र, रूस – “मैं विश्व संस्कृति महोत्सव को लोगों के बीच, देशों के बीच और राष्ट्रीयताओं के बीच एक वैश्विक संवाद के रूप में देखता हूं।”
  • श्री डोमिनिक डी विल्पिन, पूर्व प्रधान मंत्री, फ्रांस – “सच्चाई यह है कि हम में से हर किसी के पास बदलाव की कुंजी है। यह हमारा दायित्व है कि हम अपने दैनिक जीवन के आराम और सुरक्षा को छोड़ एक बेहतर दुनिया के लिए सेतुओं का निर्माण करें और अन्य संस्कृतियों व अन्य धर्मों को आपस में जोड़ने के लिए उनका प्रयोग करें। हमारा यह भी दायित्व है कि युद्ध की भावना को दूर करने के लिए शांति के हथियारों का भी आविष्कार करें।”
  • श्री रेज़्ज़र्ड कजारनेकी, उपाध्यक्ष यूरोपीय संसद – “संस्कृति राष्ट्रों और लोगों को एक बार फिर से जोड़ेगी।”
  • श्री डेस मेलबर्ड, संस्कृति मंत्री, लातविया – “संस्कृति दुनिया को एकजुट करती है और संस्कृति के लिए धन्यवाद। हम दुनिया की कई चुनौतियों के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण प्राप्त करते हैं।”
  • श्री कमल थापा, उप प्रधान मंत्री, नेपाल – “यह विशाल सभा, विविधता में एकता की अभिव्यक्ति, विश्व शांति में उनके (गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के( योगदान के लिए एक उपयुक्त पुष्‍पांजलि है।”
  • श्री वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा, अध्यक्ष, अखिल भारतीय महा सम्मेलन – “दुनिया भर के लोग इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं और मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत, जिसे कभी विश्वगुरु के रूप में माना जाता था, एक बार फिर से आर्ट ऑफ़ लिविंग के माध्यम से प्रेम और शांति के मूल्यों और संदेश का प्रसार करके उस उच्च पद को प्राप्त कर सकता है।”
  • श्री सरुनास बिरुटिस, संस्कृति मंत्री, लिथुआनिया गणराज्य – “विश्व सांस्कृतिक महोत्सव इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे संस्कृति और विविधता मानव जाति की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है। संपूर्ण विश्व को एक परिवार के रूप में देखना ही इस समागम की वास्तविक भावना बन गई है।”
  • शेख नाहयान बिन मुबारक अल नाहयान, कैबिनेट मंत्री, संस्कृति और ज्ञान विकास मंत्री, संयुक्त अरब अमीरात – “राष्ट्राध्यक्षों के रूप में हमारे कुछ निहित कर्तव्य हैं और हम अपने लोगों तथा उनकी उन भावनाओं के प्रति जवाबदेह हैं जिनके तहत से वे एक दूसरे के साथ टकराव, युद्ध और विनाश के बजाय सहिष्णुता, करुणा, और बातचीत के मूल्यों के माध्‍यम से मिलते हैं।”

 

 विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में प्रमुख वक्ता – दूसरा दिन

 

  • स्वतंत्रानंद जी महाराज, ऋषिकेश, भारत – “दुनिया के सभी धार्मिक और आध्यात्मिक शास्त्र और दुनिया में जितने भी आध्यात्मिक प्रणेता हुए हैं, उन्होंने केवल एक ही चीज़ का प्रचार किया है प्रेम, करुणा, सेवा, सहिष्णुता और सहयोग। यह सुनिश्चित करना दुनिया के सभी आध्यात्मिक प्रणेताओं का कर्तव्य है कि आध्यात्मिकता के इस दीपक को जलाए रखा जाए और इस दीपक की ज्योति का कहीं भी आग लगाने के लिए गलत प्रयोग न किया जाए।”
  • श्री श्री निर्मलानंदनाथ स्वामी, श्री आदिचुनचनगिरि, प्रमुख, महासंस्थान मठ, भारत – “गुरुदेव श्री श्री रविशंकर को सभी धर्मों के बीच सामंजस्य बनाने वाला कहा जाता है। श्री श्री हमारे दर्शन के सार को बढ़ावा दे रहे हैं और वह हमारे देश में भी सभी धर्मों के सत्य और सार को एक साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं। वह हमारी संस्कृति की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।”
  • माननीय जगद्गुरु श्री शिवरात्रि देशिकेंद्र महास्वामीजी, जगद्गुरु श्री वीरसिम्हासन मठ, भारत – “विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन में उनके प्रयासों से विभिन्न समुदायों के बीच गलतफहमी को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकता है और अंतर-सामुदायिक सद्भाव स्थापित किया जा सकता है। विश्व सांस्कृतिक महोत्सव विभिन्न संस्कृतियों को एक साथ लाने का एक गहरा आधार बनेगा जिससे संस्कृतियाँ आपसी संघर्ष का माध्यम न बनकर शांति का प्रतीक बन सकेंगीं।”
  • श्री वरुथियन संपथन, नेता प्रतिपक्ष, श्रीलंका – “हमारा लक्ष्य एक ऐसी दुनिया बनाना है जिसमें उसके सभी निवासी शांति से रहें। शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व समृद्धि की ओर ले जाता है। जिम्मेदार नेताओं और नीति निर्माताओं के रूप में, हमें शांति के इस महान लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। हम इस अद्भुत कार्यक्रम के आयोजन के लिए कार्यक्रम के आयोजकों को बधाई देते हैं जो प्रत्येक जीव तक उसकी अपनी भाषा में पहुंच सकता है।”
  • श्री राम जेठमलानी, वरिष्ठ अटॉर्नी और राज्य सभा सदस्य, भारत – “हमें जितना हो सके, मानवीय पीड़ा को कम करना सीखना चाहिए। यही हमारे अस्तित्व का मूल ध्येय होना चाहिए और यही सर्वोच्च धर्म है जिसके बारे में मैं बात कर सकता हूँ। हमें उन लोगों का ध्यान रखना चाहिए जो दर्द से पीड़ित हैं और जो हम लोगों की तरह खुशहाल नहीं हैं। ”
  • दलाई लामा – “अहिंसा और अंतर-धार्मिक सद्भाव में, भारत ने दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है और मेरा मानना है कि विश्व सांस्कृतिक महोत्सव उसी भावना से हो रहा है।”
  • श्री ज्ञानी गुरबचन सिंह, अकाल तख्त जत्थेदार, भारत – “आर्ट ऑफ़ लिविंग ने महान उपलब्धियाँ हासिल की हैं, इस संगठन ने एक मील का पत्थर स्थापित किया है और गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने 35 वर्षों के अल्प समय में बहुत कुछ महान और उल्लेखनीय कार्य किया है – उन्होंने संपूर्ण मानवता को एकसूत्र में पिरोने का महान कार्य किया है।”
  • आदरणीय डॉ. जेराल्ड एल. पादरी, डुरली, प्रोविडेंस मिशनरी बैप्टिस्ट चर्च, संयुक्त राज्य अमेरिका
    “आज हम यहाँ भाइयों और बहनों के एक मजबूत बंधन के रूप उपस्थित हैं, जो कि दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने वाले हैं-एक व्यक्ति के रूप में, भय, अज्ञानता और नफरत को दूर कर एक साथ काम करते हुए और ईश्वर से प्रार्थना करते हुए एक स्थान पर प्रेम, आशा और विश्वास की स्थापना करने के लिए।”
  • वेन. धम्म मास्टर हसिन ताओ, संस्थापक, विश्व धर्म संग्रहालय, ताइवान – “ज्ञान के साथ प्रेम और करुणा का एक सार हो जाना सभी धर्मों की प्रमुख विशेषता है। मुझे लगता है कि यदि हम ज्ञान के साथ-साथ इस प्रेम और करुणा का उपयोग करते हैं, तो हम दुनिया के सभी दुखों का इलाज कर सकते हैं और सभी समस्याओं को हल कर सकते हैं।”
  • डॉ. अहमद बदरुद्दीन हसन, ग्रैंड मुफ्ती और अध्यक्ष सुप्रीम इफ्ता परिषद, सीरियाई अरब गणराज्य – “हमारे देश में हमने सपने देखे हैं और सदियों से भारत और भारतीय सभ्यता की सुंदरता के बारे में बात की है। यही कारण है कि मैं भगवान से विनती करता हूं कि हम उन्हें अपनी शांति के तहत रखें और वे हमारे बीच शांति का प्रसार करें। मक्का और मदीना से, सभी पवित्र नबियों की मातृभूमि और दमिश्क से, मैं भारत और उसके लोगों को सलाम करता हूँ।”
  • श्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री, भारत – “भारत की संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापक दृष्टि और मानसिकता है। भारत में ऋषियों और मुनियों ने ‘परिवार’ के संबंध में अपने नजरिए को केवल अपने ही देश के नागरिकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वे दुनिया के सभी लोगों को अपना परिवार मानते थे और उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश दिया है-पूरा विश्व एक परिवार है।”
  • परम पूज्य श्री रमेशभाई ओझा, संस्थापक, देवका विद्यापीठ और संदीपनी विद्यानिकेतन, भारत – “दुनिया भर के लोग आज अपने देशों की कला, संस्कृति और संगीत परंपराओं का प्रदर्शन करने के लिए यहां एकत्र हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि पूरी दुनिया एक विश्व-परिवार के रूप में एक साथ यहाँ उपस्थित है।”
  • सुश्री सुषमा स्वराज, माननीय विदेश मंत्री, भारत – “इस समारोह में भाग लेने के लिए विश्व के संकटग्रस्त और हिंसा प्रभावित देशों से भी लोग आए हैं। जो अभी भी हिंसा और कड़वे संघर्ष से जूझ रहे हैं, दुनिया के उन हिस्सों से शांति, अहिंसा और प्रेम के संदेश देने और समर्थन करने के लिए लोग इस मंच पर आए हैं। आप (गुरुदेव श्री श्री रविशंकर) ने इस कार्यक्रम को कला और संगीत के एक अनूठे संगम के रूप में बखूबी प्रस्तुत किया है।”
  • एच.ई.बिशप, मार्सेलो सांचेज सोरोंडो, रोम, इटली – “यहाँ उपस्थित बौद्ध, हिंदू, मुस्लिम, यहूदी और ईसाई धर्म के अनुयायी इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं कि आर्ट ऑफ़ लिविंग सभी लोगों को उन्हीं के विश्वास या परंपराओं का पालन करने में मदद करता है। धर्मों में और दुनिया के देशों के बीच मनुष्यों की आंतरिक शांति पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देने और उसे पल्लवित करने के लिए आपकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है।”
  • परमपूज्य जगद्गुरु श्री शंकराचार्य वासुदेवानंद – “आज तक, मैंने कभी एक जगह मानव जाति का इतना बड़ा समागम नहीं देखा। इस उत्सव के संस्थापक, श्री श्री रविशंकरजी, एक साधक और सिद्ध पुरुष हैं, जो इस वैदिक परंपरा से संबंधित हैं और उन्होंने भारतीय संस्कृति को हर जगह बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए बहुत कुछ किया है।”
  • श्री मनीष सिसोदिया, उप मुख्यमंत्री, नई दिल्ली, भारत – “मेरा दृढ़ विश्वास है कि आपने भारत के विभिन्न हिस्सों और दुनिया के कई देशों के संतों और पवित्र आध्यात्मिक नेताओं के इस दिव्य समागम की व्यवस्था करके हम सभी को आशीर्वाद दिया है। पूरी दुनिया, आज भारत की ओर देख रही है और भारतीय संस्कृति की सार्वभौमिकता की यह झलक, वसुधैव कुटुम्बकम के संस्थापक सिद्धांत, विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के इस शानदार अवसर पर हमारे सामने एक साकार रूप में प्रस्तुत है।”
  • स्वामी रामभद्राचार्य, संस्थापक और प्रमुख, तुलसी पीठ, मथुरा, भारत – “मैं आप सभी से हमारी सांस्कृतिक संपदा और विरासत की रक्षा, संरक्षण और गर्व करने का आग्रह करूँगा, और साथ ही यह भी आग्रह करूँगा कि आप यह महसूस करने का प्रयास करें कि हर जगह सभी प्राणियों में एक दिव्यता विद्यमान है।”

 

विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में प्रमुख वक्ता – तीसरा दिन

 

  • श्री निखिल सेन, अध्यक्ष, एसएसआरवीएम ट्रस्ट, भारत – “गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का प्यार और करुणा दुनिया भर में प्रसिद्ध है। गुरुदेव के अलावा कोई अन्‍य व्‍यक्ति इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन को मूर्त रूप नहीं दे सकता था।”
  • श्री जेफ़ हॉक –  “विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में गुरुदेव के वसुधैव कुटुम्बकम (विश्व-एक परिवार) के दृष्टिकोण का शुभारंभ हुआ है और यह वह समय है जब हम अपनी प्रतिबद्धता और प्रेरणा को पुन: दोहराएं और इस समस्‍त संसार में हर एक व्यक्ति, हर एक परिवार और हर एक एक समुदाय में परिवर्तन लाने के लिए आगे बढ़ें।”
  • केन्या के बंगोमा क्षेत्र के उप-राज्यपाल श्री हिलेरी चोंगवोनी – “हमें एक परिवार होने की और इसे संसार के हर एक कोने में फैलाने की जरूरत है। संसार के विभिन्‍न महाद्वीपों और विभिन्‍न भागों से आए लोगों के साथ होने का अनुभव कितना अद्भुत है। इस धरती पर एक ही परिवार का सदस्‍य होने का साक्षी बनना अपने आप में शानदार अनुभूति है।”
  • श्री वेंकैया नायडू, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री, भारत सरकार – “इतने सारे कलाकारों और संगीतकारों का अपनी पारंपरिक वेशभूषा में यहां एकत्र हो कर इतने गरिमापूर्ण तरीके से अपनी कला एवं सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करना बेहद सराहनीय है। मैं आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवकों द्वारा बड़ी ही शांति और मर्यादित ढंग से किए गए इस वृहद कार्य को देख कर भी अत्‍यंत अचंभित हूँ।”
  • श्री केजेल मैग्ने बोंडेविक, पूर्व प्रधान मंत्री, नॉर्वे – “हम सभी न्याय में विश्वास करते हैं। हम सभी शांति पर भी विश्वास करते हैं। इसलिए, आइए हम सब एक-दूसरे से संवाद स्‍थापित करें, एक-दूसरे की बात सुनें, एक-दूसरे को समझें और उनका सम्मान करें तथा जैसे हम आज यहां कर रहे हैं, पूरे संसार में एक ऐसे ही व्‍यापक बहुसांस्कृतिक समाज का निर्माण करें।”
  • श्री मैथ्यू ऑफ़ॉर्ड, संसद सदस्य, कंजर्वेटिव पार्टी यूनाइटेड किंगडम – “यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री, श्री डेविड कैमरन, ने मुझे आपको एक छोटा सा संदेश देने के लिए कहा है। उनका संदेश है : ‘मैं भी श्री श्री रविशंकर जी को यूनाइटेड किंगडम आने का निमंत्रण भी देना चाहूंगा कि वे कृपया यूनाइटेड किंगडम के संसद के सदन में एवं हाउस ऑफ कॉमन्स में पधारें। मैं उन्‍हें एक शानदार स्वागत के लिए आश्‍वस्‍त करता हूँ।”
  • श्री हरनोन पेनागोस, संसद सदस्य, कोलंबिया – “गुरुदेव की शिक्षाओं ने कोलंबियाई लोगों के लिए बहुत सारी आशाएं जगाई हैं। आपने उन लोगों की मानसिकता को बदलने में योगदान दिया है जो कोलंबिया में युद्ध को प्रेरित कर रहे थे। इसीलिए गुरुदेव, कोलम्बिया संसद की ओर से और व्यक्तिगत रूप से अपनी ओर से भी आपके लिए बेहद सम्‍मान, आभार एवं प्रेम व्यक्त करना चाहता हूं।”
  • श्री जो लेइनन, सदस्य, यूरोपीय संसद – “यह इस पूरे संसार में होने वाला सबसे प्रभावशाली और सबसे शानदार आयोजनों में से एक है। मैं आप सभी से गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के संदेश को जीने का आग्रह करता हूं। संसार को भारत से प्रेरणा लेनी चाहिए। मुझे लगता है कि योग, ध्यान और आयुर्वेद ऐसे विश्व धरोहर हैं जिनका हर जगह अभ्यास होना चाहिए।”
  • श्री निर्ज देव, संसद सदस्य, यूरोप – “हमें और काम करना है। एक अरब लोग अब भी हैं जिन्‍हें अत्यधिक गरीबी से निकालना है। हमें अपने पर्यावरण की रक्षा करनी है, अपने जल संसाधनों को बचाना है। मैं आप सभी से इसे प्राप्‍त करने के लिए प्रतिज्ञा लेने का आग्रह करता हूं।”
  • श्री रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, भारत सरकार – “अपने सिद्धांतों, अनुभवों और पवित्र वातावरण तथा विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के इस महाकुंभ के माध्यम से आपने पुनर्जागरण में मदद की है। ईश्‍वर करे कि शांति, करुणा और सार्वभौमिक भाईचारे का संदेश संसार में चारों ओर दूर-दूर तक फैले।”
  • श्री अरुण जेटली, वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री, भारत सरकार – “मैं चकित हूं कि 35 वर्षों की छोटी अवधि में संसारभर के अनेक देशों के लोग आर्ट ऑफ लिविंग की ओर आकर्षित हुए हैं। गुरुदेव द्वारा किया गया यह सराहनीय और अद्वितीय प्रयास अपने आप में अनूठा एवं वास्‍तव में उल्‍लेखनीय है। यह गर्व का विषय है कि आपने भारत को इस तरह के भव्य उत्सव की मेजबानी करने के योग्य समझा। शांति और सौहार्द्र का संदेश नई दिल्ली से समस्‍त संसार में फैलेगा।”
  • श्री अमित शाह, अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, भारत – “पूरा संसार व्यापार और वाणिज्‍य के माध्यम से एक साथ आने की कोशिश करता है, लेकिन गुरुदेव आपने, संस्कृति के माध्यम से,पूरे संसार को एकता के सूत्र में पिरोने और एक साथ लाने का एक बेहद सफल पहल किया है। आर्ट ऑफ लिविंग का यह अत्‍यंत सराहनीय पहल संसार के सांस्कृतिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा और अपने आप में बेहद अनूठा स्‍थान प्राप्‍त करेगा।”
  • श्री अर्मिन लासेट, उपाध्यक्ष, सत्तारूढ़ ईसाई डेमोक्रेटिक पार्टी,जर्मनी – “मैं शुभकामनाएं देता हूँ कि श्रीश्री की सद्भावना, एक-दूसरे को समझने की यह क्रिया, इस महोत्सव को आयोजित करने के पीछे की भावना, आने वाले दिनों, महीनों और वर्षों में संसार को बदल देगी। आइए शांति कायम करने के इस कार्यके लिए मिल कर काम करते हैं।”
  • श्री ओलुसेगुन ओबासंजो, पूर्व राष्ट्रपति, नाइजीरिया – “मतभेद से भरे इस संसार में आइए अपनी संस्कृति की सराहना करना जारी रखते हें जिसे इस विश्व सांस्कृतिक महोत्सव ने हमारे सम्‍मुख प्रस्‍तुत किया है। आइए नाचें, गाएं, मौज करें, आनंद मनाएं, एक-दूसरे के हाथ में हाथ डाल कर, मिल-जुल कर आगे बढ़ें क्योंकि इस संसार में हमारे अस्तित्व का यही तो उद्देश्य है।”
  • श्री पीयूष गोयल, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री, भारत सरकार – “आज यहां एकत्रित हम सभी को संसार के हर कोने के सभी मनुष्यों को अपना भाई और बहन मानते हुए यहांसे शांति और विश्व-एक परिवार का संदेश लेना चाहिए। यह संदेश धर्म, राष्ट्र और अन्य सभी सीमाओं को पार कर के मानवता को एक सूत्र में बांधता है।”
  • श्री ज्योफ्री वान ऑर्डन, सदस्य, कंजरवेटिव पार्टी, यूनाइटेड किंगडम – “मैं इस अद्भुत महोत्‍सव को सफल बनाने में अपना योगदान देने वाले कलाकारों, आयोजकों और स्वयंसेवकों को बधाई देता हूं! हम सभी एक-दूसरे से सीख सकते हैं। कर्तव्य भावना, आपसी विश्वास और सहिष्‍णुता हमारे मार्गदर्शक होने चाहिए। हमारा लक्ष्‍य एक शांतिपूर्ण विश्‍व समुदाय, मुक्त राष्ट्र और एक विश्व परिवार होना चाहिए।”
  • श्री सुरेश प्रभु, केंद्रीय रेल मंत्री, भारत सरकार – “विश्व सांस्कृतिक महोत्सव एक बहुत ही अनूठा महोत्‍सव है जिसमें 155 से अधिक देश भाग लेने आए हैं। यह एक छोटे से संयुक्त राष्ट्र को देखने जैसा है। संयुक्त राष्ट्र में हमारे पास एक सुरक्षा परिषद होता है जो संसार को एक सुरक्षित भविष्य प्रदान करता है। मुझे लगता है कि यह महोत्‍सव विभिन्न संस्कृतियों और भिन्न-भिन्‍न पृष्ठभूमि के लोगों को एक साथ जोड़ कर संसार में सुरक्षा की भावना लाने का सबसे सर्वोत्‍तम तरीका है।”
  • सुश्री सुमित्रा महाजन, अध्यक्ष, लोकसभा, भारत – “मुझे पूरा यकीन है कि प्रेम का ये संदेश समस्‍त संसार में फैलेगा। वसुधैव कुटुम्बकम और क्रुवंतो विश्वम आर्यम और एक आदर्श, सुसंस्कृत एवं शांतिपूर्ण समाज के निर्माण का संदेश निश्चित रूप से पूरे संसार में जाएगा।”
  • श्री अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, नई दिल्ली, भारत – “हिंसा को बदले में हिंसा कर के नहीं रोका जा सकता है। हिंसा और नफरत को केवल प्रेम और शांति से ही जीता जा सकता है। गुरुदेव यही संदेश आज हमें आध्यात्मिकता, अपने प्रेम और करुणा के माध्यम से दे रहे हैं”
  • गुरुदेव श्री श्री रविशंकर, आध्यात्मिक नेता और आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक, भारत – “जब हम मजबूत और भीतर से स्थापित होते हैं, तब ही हम पूरी दुनिया को संरक्षा और सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। जब हम भीतर से अस्थिर होते हैं, तब हम यह सब नहीं कर सकते हैं। हमारा काम सभी के हृदय एवं मन को जोड़ना है, और इसे हम एक मुस्कान के साथ करते रहेंगे।”
  • श्री खिल राज रेगमी, पूर्व प्रधानमंत्री नेपाल  – “विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में संसारभर के लोगों की भागीदारी और उपस्थिति को देखकर, मुझे लगता है कि ये महोत्‍सव विश्व-एक परिवार जो कि आर्ट ऑफ लिविंग का लक्ष्‍य है, को जीवन देने में सक्षम रहा है।”
  • श्री आर.वी. देशपांडे, उच्च शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री, कर्नाटक सरकार, भारत – “संसार के तनाव और चिंताओं, संघर्ष और युद्ध के बीच, आर्ट ऑफ़ लिविंग ने अपने अस्तित्व के 35 वर्षों में अत्‍यंत ही सराहनीय कार्य किया है। आर्ट ऑफ़ लिविंग के सार्वभौमिक शांति के संदेश और मूल मानवीय मूल्‍यों में परिवर्तन बेहद सराहनीय हैं।”
  • श्री माइकल पर्लिस, अध्यक्ष और सीईओ, फोर्ब्स मीडिया एलएलसी, संयुक्त राज्य अमेरिका – “मुझे महसूस हो रहा है कि मैं अच्‍छी संगति में हूँ। एक अच्छी कंपनी बनने के लिए हमें अच्‍छे मूल मानवीय मूल्‍यों एवं उत्‍तम कोटि के सोच की आवश्‍यकता है।”
  • श्री कमल थापा, उप प्रधानमंत्री, नेपाल – “स्थिर अर्थव्यवस्था की कमी, गरीबी, अभाव और लोगों के विश्वास और संस्कृति पर अतिक्रमण को जन्म देती है, जो कि अंतत: संघर्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। शांति की नींव लोकतंत्र, बाजार अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर निर्भर होती है। यह अति आवश्‍यक है कि हम समाज में सभी समुदायों का शामिल होना सुनिश्चित करें।”
  • श्री ओलुसेगम ओबासंजो, पूर्व राष्ट्रपति,नाइजीरिया – “नेतृत्‍वकर्ताओं को आज सार्वभौमिक सोचना चाहिए और स्थानीय, सहकारी एवं समावेशी रूप से कार्रवाई करनी चाहिए। अथल-थलग पड़ कर कोई कोई भी देश विकास नहीं कर सकता। अत: आज नेताओं को व्‍यवहारिक होना चाहिए और मिल-जुल कर एक साथ कार्य करना चाहिए। इन मुद्दों से निपटने के लिए एक ऐसा वातावरण बनाने की आवश्यकता है, जो यह निर्धारित करे कि हमें भविष्य में शांति उपलब्‍ध हो।”
  • श्री किशोर बियानी, अध्‍यक्ष एवं ग्रुप सीईओ, फ्यूचर ग्रुप, भारत – “संसार का व्‍यापार कुछ मूल सिद्धांतों पर आधारित है, एक सतत अभ्‍यास का पालन करने के लिए व्‍यक्ति की आवश्‍यकताओं को पैदा करना। भविष्य को देखते हुए, व्‍यक्ति को एक सतत व्‍यापारिक मॉडल के साथ प्रौद्योगिकी में अद्तन नवाचारों को लागू करना चाहिए।”
  • श्री निर्ज देव, संसद सदस्य, यूरोप – “संसार तेजी से बदल रहा है और हमें उस बदलाव का भाग बनने की जरूरत है। सांप्रदायिकता भविष्य का द्योतक बन जाएगी। हमें उन नियमों को रोकना होगा जो उद्यमों के लिए हानिकारक हैं और नवाचारों और नई युक्तियों को बढ़ावा देना होगा।”
  • प्रो. जीएल पीरिस, पूर्व विदेश मंत्री, श्रीलंका – “श्रीलंका एक ऐसा देश है जिसके समाज में सभी प्रकार के लोग हैं। जहां हम एक साथ आगे बढ़ने और एक-दूसरे पर विश्वास करने तथा अपने नागरिकों को सहयोग करने का कार्य करते हैं। मेरा मानना है कि इस तरह से श्रीलंका आगे बढ़ सकेगा।”
  • सुश्री अरुंधति भट्टाचार्य, अध्यक्ष, भारतीय स्टेट बैंक – “नैतिकता और लाभप्रदता सहसंबद्ध हैं। जो कंपनियाँ नैतिक हैं उनकी लाभप्रदता भी दीर्घकालिक होती है। हम वास्तव में सबसे निचले स्‍तर से ले कर ऊपर तक के हर व्यक्ति के आर्थिक विकास में विश्वास रखते हैं। हम एक देश और संगठन के रूप में, केवल तभी प्रगति करेंगे जब हम बार-बार आपसी विश्वास का प्रदर्शन करेंगे एवं नैतिक मूल्यों का क्रियान्‍वयन करेंगे।”