वैश्विक सोच वैश्विक बोल | Think global, talk global

वैश्विककरण के युग में, भारतीय नेताओं को आजकल अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बोलने के लिए काफी बुलाया जा रहा है। इससे हमारे राजनेताओं के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि वे विश्‍वव्‍यापी परिप्रेक्ष्य में...

राजधानी दिल्ली से सबक | A Capital Lesson

दिल्ली विधानसभा चुनावों ने दिखा दिया कि लोकतंत्र में जनता को मामूली नहीं समझना चाहिए । अप्रत्याशित मतदान तथा लगभग सर्वसम्मत परिणाम आने से राजनीति में एक नया बदलाव आ गया । आप (AAP) ने पिछले साल की...

पुनर्विचार का समय : भगवे की लहर तथा धर्मनिरपेक्षता का पतन | Time to rethink : Saffron surge and the secular debacle

“जो दिखाई देता है वह नहीं है और जो दिखाई नहीं देता वह है”, यह पुरानी कहावत है, जो कि भारतीय राजनीति का बहुत सही प्रतिपादन करती है। कांग्रेस के नेतृत्व में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) स्वयं...

आओ दौड़ शुरू करते हैं…पर जल्दी! | Let the race begin… but early!

भारत में जब भी चुनाव आयोजित होते हैं, उस समय देश को भ्रष्टाचार, दल बदल, विद्रोह, अराजकता, अपराध और भ्रम के दलदल में फेंक दिया जाता है। अक्सर उम्मीदवारों के नाम अंतिम चरण में घोषित किए जाते हैं और बहुत...

उम्मीदें रद्द, मौका चूकना | Hope quashed, Opportunity missed

जब भारतीय राजनीतिक क्षितिज पर आम आदमी पार्टी का उदय हुआ, तब देश में युवा और जोशीले नेता की संभावना उभरी, जो की राजनीतिक व्यवस्था की सफाई के विषय में संजीदा लग रहा था। यद्यपि इसकी शुरुआत एक गैर राजनीतिक...