गणतंत्र दिवस : आध्यात्मिक दृष्टिकोण | A spiritual angle to the Republic Day

हम अपनी माँ के गर्भ में एकांत में नौ महीने बिताते हैं। हमारे जन्म दिन से ही हम समाज के हो जाते है। ३ वर्ष के होने तक, हमारे अपने व्यक्तित्व की पहचान में हम घिरने लगते हैं और हमारा निजी व्यक्तिव बनने लगता है।

विश्वास की डोर न टूटे | Keeping the Faith

जीवन में प्रगति के लिए इन तीनों पर विश्वास आवश्यक है - स्वयं पर, समाज की अच्छाई पर तथा ईश्वर पर विश्वास। यद्यपि अभी हाल में हुई केदारनाथ की घटना, जिसमें अनेक निर्दोष लोग जीवन से हाथ धो बैठे, यह देखकर...

पांच प्रकार के प्रश्न | Five types of questions

जिज्ञासा की प्रवृत्ति ही इस ग्रह में हो रहे प्रत्येक महान अन्वेषण का कारण है। जब यह जिज्ञासा बाहर की ओर निर्देशित होती है तब,” यह क्या है”?”, यह कैसे हुआ”? प्रश्न उठते हैं और यही विज्ञान है। जब यह...

जीवन के विभिन्न पक्ष | Different faces of life

प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि हम सब इस विशाल जीवन सागर में सीपियों की तरह तैर रहे हैं। यद्यपि सब समान चेतना से जन्मे हैं, लेकिन कोई भी दो जीवन एक जैसे नहीं हैं। हम सबके जीवन कितने भी अलग हों, सब एक दूसरे...

प्रतिबंध सदैव कारगर नहीं होते | A ban doesn’t always work

कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम के विषय में विवाद व तमिलनाडु में उस पर प्रतिबंध पर बहुत कुछ कहा गया है। मजेदार बात यह है कि कुछ माह पहले एक और फिल्म आई थी जिसमें सारे हिंदू रीति रिवाजों और प्रतीकों को...