‘योग’ और ‘ध्यान’ समय की जरूरत है | Yoga and meditation are the need of the hour

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मानसिक स्वास्थ्य आज पृथ्‍वी पर सबसे बड़े मुद्दों में से एक बन गया है। वर्तमान समय में संसारभर में कोरोना महामारी फैली है और जनता लॉकडाउन में हैं तथा ऐसे में लोगों के दिल और दिमाग में बहुत चिंता है। इससे बच निकलने का निश्चित रूप से सबसे अच्छा समाधान ‘योग और ध्यान’ है।

यह अत्यावश्यक है, और मैं तो कहूंगा कि आज समय की मॉंग भी यही है कि संसार के कोने-कोने में योग और ध्यान दोनों की शुरुआत की जाए क्‍योंकि इसके बहुत अधिक लाभ हैं। योग मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के निर्माण में मदद करने के साथ-साथ हमें शारीरिक रूप से फिट और भावनात्मक रूप से स्थिर रखता है। योग का नियमित अभ्यास ऊर्जा के स्तर को उच्च रखता है और साथ ही व्‍यक्ति के उत्साह को भी बढ़ाता है। हम अपने स्‍पंदनों के माध्यम से बहुत कुछ प्रकट करते हैं। योग हमारे स्‍पंदनों को सकारात्मक और आकर्षक बनाता है।

हम सब का यह उत्‍तरदायित्‍व है कि हम यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक नागरिक को योग करने का अवसर उपलब्ध हो। जिन्हें आंतरिक शांति प्राप्‍त हुई है, उन्‍हें इसे सबके साथ बॉंटना चाहिए। मैं योग के प्रत्येक छात्र और शिक्षक से आग्रह करता हूं कि वे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचें और इस अनमोल ज्ञान को सबमें बॉंट कर, इस संसार को फिर से पटरी पर लाने में अपनी भूमिका निभाएं।

मैं, यह जान कर अत्‍यंत प्रसन्‍न हूँ कि आज संसार की एक तिहाई आबादी योग का अभ्यास कर रही है और मैं आशा करता हूँ कि शेष दो तिहाई लोग भी इन अभ्‍यासों को अपना लेंगे। जैसे आज सेलफोन संसार के अरबों घरों तक पहुँच गया है, हमें योग को इस पृथ्‍वी पर हर घर में और हर व्यक्ति तक पहुँचाना है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, आइए हम अपने समर्पण को एक नया आयाम दें, और ऐसा ही करने का संकल्प लें। सभी में ध्यान का ज्ञान और पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाना।

आइए हम आशा करें कि आने वाले वर्षों में हम बड़े पार्कों में, बड़े समूहों को एकत्र कर सबके साथ मिल कर योग करेंगे और एक-दूसरे को प्रेरित करने में सक्षम होंगे। परंतु, इस वर्ष हम संसार भर में ऑन लाइन होने वाले कार्यक्रमों से ही संतुष्ट होते हैं।

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रोजाना दोपहर 12 बजे और शाम 7.30 बजे गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के साथ ध्यान के सीधा प्रसारण में शामिल हों।

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