अवसाद से गहरी प्रसन्नता की ओर | From depression to deep happiness

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एक बार एक व्यक्ति डॉक्टर के पास गया और शिकायत की कि उस,के साथ कुछ गलत हो रहा है। उसके पूरे शरीर में तकलीफ़ हो रही थी और वह बहुत दुखी था। परंतु उसके सारे परीक्षण सामान्य थे। डॉक्टर ने कहा,” तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं हो रहा है सर्कस देखने जाओ और जोकर को देखो, उसको देखकर तुम्हें हंसी आएगी।“ तब उस व्यक्ति ने कहा, “सर्कस का वह जोकर मैं ही हूं।”

दूसरे लोगों का मनोरंजन करना और हंसाना एक अलग बात है और खुद को प्रसन्न रखना अलग बात है। प्रसन्नता किसी कौशल या योग्यता से नहीं आती। जब तक तुम आत्म निरीक्षण के द्वारा यह नहीं समझ जाते कि तुम्हारी चेतना का सत्य स्वरूप क्या है, प्रसन्नता बहुत दूर की बात है। प्रसन्नता की सच्ची चाहत के लिए आत्म निरीक्षण की भावना के साथ ध्यान की गहराई में जाना अति आवश्यक है। छठी सदी के भारतीय दार्शनिक और बुद्धिजीवी आदि शंकराचार्य ने कहा कि अल्पकालिक वस्तुओं के प्रति उदासीनता और आंतरिक चेतना के साथ संबंध ही सच्ची प्रसन्नता देता है। उन्होंने आगे कहा कि “ऐसी कौन सी प्रसन्नता है जो वैराग्य से नहीं मिलती?”  शब्द एकाकी संस्कृत के एकांत शब्द से बना है जिसका अर्थ है “अकेलेपन का अंत” अकेलापन रिश्ते बदल देने से नहीं मिटता, चाहे नए रिश्ते अधिक समझदारी पूर्ण हो या भावनात्मक। यह अकेलापन तभी दूर हो सकता है जब तुम अपने सच्चे स्वरूप का पता लगा लेते हो।

रॉबिन विलियम्स हजारों लोगों को हंसाता था,परंतु अपने अंदर बैठे गहरे अकेलेपन को समाप्त नहीं कर सका। यह उदाहरण साफ तौर पर दर्शाता है कि केवल आध्यात्मिक सांत्वना ही तुमको निराशा वह कष्टों से बाहर निकाल सकती है। बाहरी धूमधाम,दिखावा,पैसा,प्रशंसा, मनुहार आंतरिक असंतोष को दूर करने में सहायक नहीं हैजब तक वह जीवित था उसने लोगों को हंसाया और अपनी मृत्यु के बाद भी यह संदेश देकर गया कि सांसारिक बातों से अपनी आंखों को ऊपर उठाकर, उच्च सत्ता को देखने की कोशिश करो। उसके साथ संपर्क स्थापित हो जाने से सारे संघर्ष दूर हो जाएंगे और तुम पूर्ण रुप से एक अलग दुनिया में खो जाओगे, इस शांति को मैं मौन कहूंगा, परमानंद की प्राप्ति की झलक जो तुम्हारे अंदर ही है वह तुम ही हो। तुम्हें बस इस आंतरिक परमानंद में गोता लगाना है।

किसी भी मशीन का तब तक ठीक प्रकार से प्रयोग नहीं किया जा सकता जब तक उसकी निर्देश पुस्तिका को पढ़ कर उस मशीन को चलाने का सही तरीका ना पता चल जाए। आध्यात्मिक-ज्ञान जीवन के लिए निर्देश पुस्तिका है। जिस प्रकार गाड़ी चलाने के लिए हमें स्टेयरिंग घुमाना, पहिया, क्लच और ब्रेक आदि का प्रयोग करना आना चाहिए,उसी प्रकार अपने मन को द्ढ व स्थिर रखने के लिए आवश्यक है- जीवन शक्ति ऊर्जा के मौलिक नियमों को जानने की। यह एक संपूर्ण विज्ञान है ,प्राणायाम का। जब हमारे प्राण या जीवन शक्ति असंतुलित होती है,हमारा मन भी भावनाओं के रोलर कोस्टर के साथ-साथ ऊपर नीचे होता रहता है ।

मन को मन के स्तर पर ही नियंत्रित नहीं किया जा सकता। मानसिक रोगों की चिकित्सा के लिए आरंभ में मनोचिकित्सक के पास परामर्श लेने के लिए जाते हैं, परंतु यह लंबे समय के लिए पूरा इलाज नहीं कर पाते। केवल सकारात्मक विचार थोप देने से ही इसका इलाज संभव नहीं हो पाता, बल्कि मामला और पेचीदा होकर बिगड़ जाता है ।दवाइयां जैसे कि (एंटीडिप्रेसेंट) तनाव मुक्त करने की दवा केवल आरंभ में असर करती है,  बाद में उस बीमारी से दूर करने की जगह पर धीरे-धीरे व्यक्ति उसका ही आदी हो जाता है।

यहां श्वास लेने के रहस्य का ज्ञान वास्तव में जीवन को बदलने में सहायता करता है। श्वास लेने की प्रक्रिया यानी सुदर्शन क्रिया जीवन शक्ति को संतुलित करती है और इसके फलस्वरूप मन भी स्थिर होता जाता है जब हम ध्यान का अभ्यास करते हैं तो यह गहराई से हमें पूर्णता प्रदान करता है, आंतरिक आयाम खुलने लगते हैं और इसका असर धीरे-धीरे हमारे जीवन के प्रत्येक भाग पर फैलने लगता है। शरीर में प्राण ऊर्जा बढ़ जाती है, इससे बदलाव का साक्षात अनुभव होता है, जिसके लिए किसी जबरदस्ती के मानसिक व्यायाम की आवश्यकता नहीं पड़ती। व्यक्ति अधिक प्रसन्न और कलात्मक हो जाता है तथा मन व भावनाओं को अच्छी प्रकार संभाल पाता है।

अवसाद से बाहर निकलने का एक और अच्छा साधन है सेवा की भावना को बढ़ाना। मैं समाज के लिए क्या कर सकता हूं की सोच। बड़े कार्यो की तरफ अपना ध्यान लेकर जाने से जीवन की दिशा बदल जाती है  और केवल अपने विषय में सोचने की जगह विश्व कल्याण के बारे में सोचने लगते हैं। जिन समाजों में सेवा के मूल्य सिखाए जाते हैं, बलिदान और सामाजिक सहयोग जिनके अंदर बसे हुए हैं, उन में तनाव आत्महत्या के विचार कभी नहीं आते। सिख समुदाय इसका महान उदाहरण है।

जीवन प्रसन्नता और पीड़ा का मिश्रण है पीड़ा अपरिहार्य है परंतु पीड़ित होना वैकल्पिक है। जीवन को बड़े आयाम से देखने पर आप कष्टकर समय को साहस के साथ झेल सकोगे।यह जान लो कि इस दुनिया में आपकी बहुत अधिक आवश्यकता है। अपनी अनंत संभावनाओं के साथ यह जीवन एक उपहार है । यह प्रसन्नता का फव्वारा है जो केवल हमें ही नहीं भिगोता, बल्कि हमारे साथ और बहुत सारे लोगों को भी यह आनंद से भिगो देता है।

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