इच्छायें

 

क्रोध आता है, जब तुम्हारी इच्छा पूरी नहीं होती है| इच्छाएं दो प्रकार की होती हैं – शारीरिक स्तर से और मानसिक स्तर से| शारीरिक स्तर पर, इच्छाएं तुम्हारे भोजन, जल, वातावरण व तुम्हारे साथियों के कारण शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं से प्रभावित होती हैं| मानसिक स्तर पर, पिछले प्रभाव उठने वाली इच्छाओं को प्रभावित करते हैं| केवल ध्यान और प्राणायाम इसमें बदलाव ला सकता है|

 

खूब पढ़े-लिखे लोग भी गलतियाँ करते हैं| कोई बात नहीं| जो बीत गया, कोई बात नहीं| उसे छोड़ो| वर्तमान क्षण में तुम निर्दोष हो| जो स्व-आरोप (खुद को दोषी ठहराने) में फंस जाता है, वह वही गलतियां बार-बार दोहराता है| तो इसके लिए तुम्हें भक्ति-सूत्रों को सुनना चाहिए| ईश्वर को अपनी गलतियां समर्पित कर दो| मात्र समर्पण से तुम अपनी हजारों इच्छाएं शांत कर सकते हो|

 

इच्छाओं का कोई अंत नहीं है| कुछ लोग, किसी अन्य से अधिक धन पाने के लिए अपना जीवन, धन कमाने में गुज़ार देते हैं| लोग कभी-कभी अपने उपयोग से अधिक कपड़े व जूते खरीदते रहते हैं| वहाँ संतोष नहीं है|

 

केवल सेवा के द्वारा तुम सच्चे संतोष और आनंद का अनुभव कर सकते हो| और वह आनंद तुम्हारी इच्छाओं को कम कर देगा| लोभ का कोई अंत नहीं| इच्छाएं रखना ठीक है| इसमें कोई नुकसान नहीं है| लेकिन तुम्हें प्रसन्न रहना चाहिए| तुम्हारी प्रसन्नता, तुम्हारी किसी इच्छा की पूर्ति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए| हमें शांत और केंद्रित प्रवृत्ति रखनी चाहिए, सजगता रखनी चाहिए और यम-नियम से रहना चाहिए| अपने जीवन में उन्हें यथासंभव अपनाओ| किसी चीज़ की अति मत करो|