साक्षरता

 

जिन परिवारों के बच्चे आर्थिक दबाव की वजह से शिक्षा से वंचित रह कर, बचपन से ही जीविका और भरण-पोषण की चिंता में रहते हैं, उनके लिये श्री श्री की सोच कुछ ऐसी है कि शिक्षा के ज़रिये उनका जीवन निखारा जाये। इसी हेतु से भारत के आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में तथा शहरों में झुग्गी-झोपड़ियों में २०४ मुफ़्त विद्यालयों की स्थापना की गई है। २३,५०० बच्चे इन विद्यालयों से लाभान्वित हो रहे हैं। इन बच्चों में लगभग ९५% बच्चे ऐसे हैं जिनके परिवार में कोई भी साक्षर नहीं है।

 

literacy_1.jpgउज्ज्वल भविष्य की ओर

अक्तूबर २००७ में आर्ट आफ़ लिविंग नें यूनिसेफ़ (UNICEF) के साथ मिल कर बाल अधिकारों के लिये पहल की। बच्चों के लिये उत्तम शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ साथ, हम स्वास्थ्य-चिकित्सा भी मुहैया कराते हैं। बच्चे एवं उनके माता-पिता, नियमित रूप से स्वास्थ्य-चिकित्सा एवं तनाव-मुक्ति के शिविरों में आते हैं। बच्चों को स्कूली यूनिफ़ार्म, किताबें, और दोपहर का भोजन भी दिया जाता है।

 

इन १८५ विद्यालयों में से एक विद्यालय हमारे बैंगलोर आश्रम के निकट भी स्थित है। यह विद्यालय सन १९८१ में, ३० बच्चों से शुरु हुआ था, और आज यहां आस-पास के ४५ गांवों से २४०० से अधिक बच्चे सुशिक्षित हो रहे हैं।
 

प्रशंसा पत्र
"मैं इस विद्यालय में बहुत दूर के गांव से आता हूं। मुझे यहां तक आने के लिये विद्यालय से मुफ़्त स्कूल बस लेने आती है। यहां बहुत बड़ा खेल का मैदान भी है, और हमारे शिक्षक हमें खेल-कूद में भाग लेने के लिये प्रोत्साहित करते हैं। हम और भी बहुत कुछ सीखते हैं, जैसे कि कम्प्यूटर पर काम करना, सिलाई, इत्यादि। यह मेरा सौभाग्य है कि मैं आज यहां पढ़ता हूं।"
- निरंजन बालाकृष्णन, नागापट्टिनम, भारत

"मेरा बच्चा पहले लोगों से शरमाता था, पर यहां स्कूल आने से उस में बहुत बदलाव आया है। वह नियमित रूप से स्कूल आना चाहता है और, दौड़ भाग कर, हंसता और खेलता है। यहां सिखाये गये आर्ट एक्सेल कोर्स से उसका आत्मविश्वास बढ़ गया है। उसे वहां जाना इतना पसंद है कि अब वह रविवार को भी स्कूल जाना चाहता है!"
- वासंति कुलकर्णी, धारावी, भारत