कैदियों का पुनर्वसन कार्यक्रम
"दृष्टि का विस्तार करे तो पायेंगे कि प्रत्येक अपराधी खुद एक शिकार है और मदद की याचना कर रहा है। अगर उसे ठीक कर दिया जाये तो पृथ्वि से अपराध मिट जायेगा।" - श्री श्री
प्रत्येक अपराधी के भीतर छिपे शिकार की मदद हेतु...
श्री श्री ने सन १९९० में कारागृहों में प्रिज़न स्मार्ट कार्यक्रम शुरू किया, ताकि कैदियों को स्वस्थ बना कर समाज के मुख्य प्रवाह में जोड़ा जा सके। इस कार्यक्रम की विशेषता है आत्म विकास के लिये कार्यशालायें, जिसमें मानवीय गुण, माइक्रो-फ़ाइनैन्स एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण भी शामिल हैं। इस प्रकल्प में कानून के रक्षक अधिकारियों के लिए भी कार्यक्रम है।
इस कार्यक्रम में भाग लेने के बाद, तायवान के तैपी तू-चेन जेल और तैचुंग जेल में ६०४ कैदियों में से आधे से ज़्यादा नें यह अनुभव बताया कि उनके क्रोध, अवसाद, डर, अनिद्रा जैसे नकारात्मक भावों में बहुत कमी आई है।
भारत में सन १९९९ में कैदी पुनर्वसन कार्यक्रम, तिहाड़ जेल से शुरु किया गया था। अब तक तिहाड़ जेल के ३०,००० से भी ज्यादा कैदियों ने इस में हिस्सा लिया है।
न्यूज़ीलैंड में ये योजना किशोर न्याय विभाग की साज़ेदारी में शरू की गई थी। मलावी के चसिली जेल में इस योजना के बड़े ही अद्भुत परिणाम दिखे।
युनायटेड अरब अमीरात के अल वाठ्बा महिला जेल में इसे खूब सराहा गया है। डेनमार्क में देश की न्याय व्यवस्था ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेकर बाल अपराधियों को जेल भेजने के बजाये आर्ट ऑफ़ लिविंग प्रोग्राम करने का आदेश दिया। फिजी, कोसोवो, और इराक में सभी जेलों में यह योजना लागू है। तायवान आफ़्टर केयर असोसियेशन नें आर्ट आफ़ लिविंग के इन प्रयासों को सन २००५ में मान्यता दी।
हाल ही में आर्ट आफ़ लिविंग नें ‘सृजन’ (SRIJAN Social Rehabilitation of Inmates in Jail and Aiding the Needy) की पहल की है। सृजन कार्यक्रम के तहत, कैदियों को नृत्य, नाट्य, संगीत तथा व्यक्तित्व विकास का सुंदर मौका मिलता है। इस पहल के अंतर्गत व्यावसायिक कला, पोशाक, आभूषण, फ़ैशन टेक्नॉलजी एवं बुनाई, जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिये जाते हैं।
हाल ही में नई दिल्ली में सृजन की तीन कार्यशालायें सम्पन्न हुई, जिस में कैदियों को लेखन सामग्री, गिफ़्ट बॉक्स, तथा लैम्प-शेड बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। आर्ट आफ़ लिविंग, अपनी सहयोगी संस्थाओं तथा स्थानीय गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ मिल कर इस हस्तशिल्प की देश-विदेश में बिक्री कर, शिल्पकारों को आय उपलब्ध करा उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम एवं समाज में उपयोगी भूमिका निभाने में सहायता करता है।
-पोल्स्मूर जेल, केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका से एक कैदी
- जी ऍम कोल्मिकोव, सेना मुख्यालय के प्रमुख, घरेलू मामलों के मंत्रालय, रूस
- माइनर चैलेंजर मेमोरियल यूथ सेंटर, लॉस एंजिल्स, संयुक्त राज्य अमरीका
- अशोक चौधरी, राज्य मंत्री, गृह विभाग (जेल), बिहार
-किरन बेदी पूर्व महानिरीक्षक कारागार, तिहाड़ जेल, पूर्व संयुक्त आयुक्त, पुलिस
- पूर्व आतंकवादी, उधमपुर जेल, जम्मू एवं कश्मीर, भारत
- निलोफर बैकुल्ला जेल, मुंबई, भारत
-कैदी, बेऊर जेल, बिहार, भारत