कैदियों का पुनर्वसन कार्यक्रम

 

"दृष्टि का विस्तार करे तो पायेंगे कि प्रत्येक अपराधी खुद एक शिकार है और मदद की याचना कर रहा है। अगर उसे ठीक कर दिया जाये तो पृथ्वि से अपराध मिट जायेगा।" - श्री श्री

 

prisoner_rehab1.jpg प्रत्येक अपराधी के भीतर छिपे शिकार की मदद हेतु...
श्री श्री ने सन १९९० में कारागृहों में प्रिज़न स्मार्ट कार्यक्रम शुरू किया, ताकि कैदियों को स्वस्थ बना कर समाज के मुख्य प्रवाह में जोड़ा जा सके। इस कार्यक्रम की विशेषता है आत्म विकास के लिये कार्यशालायें, जिसमें मानवीय गुण, माइक्रो-फ़ाइनैन्स एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण भी शामिल हैं। इस प्रकल्प में कानून के रक्षक अधिकारियों के लिए भी कार्यक्रम है।

इस कार्यक्रम में भाग लेने के बाद, तायवान के तैपी तू-चेन जेल और तैचुंग जेल में ६०४ कैदियों में से आधे से ज़्यादा नें यह अनुभव बताया कि उनके क्रोध, अवसाद, डर, अनिद्रा जैसे नकारात्मक भावों में बहुत कमी आई है।

विश्व के कई जेलों में कैदियों के लिये यह कार्यक्रम उपलब्ध है
भारत । रूस । दक्षिण अफ्रीका । संयुक्त राज्य अमरीका । नमीबिया । थाईलैंड । न्यूज़ीलैंड । कैमरून । मलावी । इस्रायल । ऑस्ट्रेलिया । दुबई । गुअर्नसे । केन्या । मेक्सिको । लिथुअनिया । बुल्गारिया । कोसोवो । यूनाइटेड किंगडम । डेनमार्क । सिंगापुर । फिजी । स्कॉटलैंड । तायवान । नोर्वे । क्रोएशिया ।

 

भारत में सन १९९९ में कैदी पुनर्वसन कार्यक्रम, तिहाड़ जेल से शुरु किया गया था। अब तक तिहाड़ जेल के ३०,००० से भी ज्यादा कैदियों ने इस में हिस्सा लिया है।

न्यूज़ीलैंड में ये योजना किशोर न्याय विभाग की साज़ेदारी में शरू की गई थी। मलावी के चसिली जेल में इस योजना के बड़े ही अद्भुत परिणाम दिखे।

युनायटेड अरब अमीरात के अल वाठ्बा महिला जेल में इसे खूब सराहा गया है। डेनमार्क में देश की न्याय व्यवस्था ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेकर बाल अपराधियों को जेल भेजने के बजाये आर्ट ऑफ़ लिविंग प्रोग्राम करने का आदेश दिया। फिजी, कोसोवो, और इराक में सभी जेलों में यह योजना लागू है। तायवान आफ़्टर केयर असोसियेशन नें आर्ट आफ़ लिविंग के इन प्रयासों को सन २००५ में मान्यता दी।

हाल ही में आर्ट आफ़ लिविंग नें ‘सृजन’ (SRIJAN Social Rehabilitation of Inmates in Jail and Aiding the Needy) की पहल की है। सृजन कार्यक्रम के तहत, कैदियों को नृत्य, नाट्य, संगीत तथा व्यक्तित्व विकास का सुंदर मौका मिलता है। इस पहल के अंतर्गत व्यावसायिक कला, पोशाक, आभूषण, फ़ैशन टेक्नॉलजी एवं बुनाई, जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिये जाते हैं।

हाल ही में नई दिल्ली में सृजन की तीन कार्यशालायें सम्पन्न हुई, जिस में कैदियों को लेखन सामग्री, गिफ़्ट बॉक्स, तथा लैम्प-शेड बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। आर्ट आफ़ लिविंग, अपनी सहयोगी संस्थाओं तथा स्थानीय गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ मिल कर इस हस्तशिल्प की देश-विदेश में बिक्री कर, शिल्पकारों को आय उपलब्ध करा उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम एवं समाज में उपयोगी भूमिका निभाने में सहायता करता है।

प्रशंसापत्र
"मैं वास्तव में झगड़ा करने के मौके ढूंढता था, पर अब यह कोर्स करने के बाद, मै बिलकुल बदल गया हूँ। मैं अब खुद को झगड़ों से दूर रख पाता हूँ।"
-पोल्स्मूर जेल, केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका से एक कैदी
"मेरा सुझाव है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सभी युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में सैनिकों के लिए लागू किया जाये।"
- जी ऍम कोल्मिकोव, सेना मुख्यालय के प्रमुख, घरेलू मामलों के मंत्रालय, रूस
"मैंने कभी यह सोचा न था कि अपनी ही सांस के ज़रिये मैं जीवन मेम इतना अच्छा अनुभव कर पाऊंगा। वाह! मुझे बहुत आराम और शांति का अनुभव हो रहा है। और मैंने इसे किया अपनी ही सांस के सहारे!"
- माइनर चैलेंजर मेमोरियल यूथ सेंटर, लॉस एंजिल्स, संयुक्त राज्य अमरीका
"प्रिज़न स्मार्ट कोर्स से जेल के कैदियों में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है! यहाँ तक की कुख्यात अपराधियों के अंदर भी पार्ट १ कोर्स करने के कारण काफ़ी बदलाव आया है! कैदियों के कड़वाहट और एकरसता के जीवन के बीच, जीवन जीने की कला फाउंडेशन ने कैदियों को अवसर दिया अपनी भावनाओं को बाहर निकालने और मन को शुद्ध करने का"
- अशोक चौधरी, राज्य मंत्री, गृह विभाग (जेल), बिहार
"इतना संतोषजनक अनुभव था जीवन जीने की कला के साथ काम करने का कि मैं आग्रह करूंगी कि दुनिया की सभी जेलों, सभी पुलिस बल, सभी स्कूलों, अस्पतालों, अन्य संस्थाओं और बाकी भी हर जगह पर इन कार्यक्रमों को लागू किया जाये।"
-किरन बेदी पूर्व महानिरीक्षक कारागार, तिहाड़ जेल, पूर्व संयुक्त आयुक्त, पुलिस
"यदि एक लोहे की छड़ को बीचोबीच तपाया जाये तो जैसे वह छड़ बीच से मुड़ कर एक तरफ़ झुक जाती है, वैसे ही मेरा जीवन भी बदल गया है! नब्बे के दशक में मैं धूम्रपान करता था। बीस्वीं सदी में थोड़ा सुधरा। पर, अब मैं पूरी तरीके से बदल चूका हूँ। अब मैं समझ चुका हूं कि केवल प्यार दुनिया को जीत सकता हैं।"
- पूर्व आतंकवादी, उधमपुर जेल, जम्मू एवं कश्मीर, भारत
"कई बार मैं मरना चाहती था ताकि जेल में होने की वजह से महसूस होने वाली शर्मिंदगी से छुटकारा मिल सके। मेरी रातों की नींद हराम हो गई थी और लगातार नींद की गोलिया खानी पड़ती थी। पर अब सुदर्शन क्रिया करने के बाद, पहली बार मैं पूर्व कर्मों को मिटते हुए देख पा रही हूँ और मैं वर्णन नहीं कर सकती कि मैं कैसा महसूस कर रही हूं, और मैं कितना हल्का महसूस कर रही हूँ! अब मैं अपने आप से मुखातिब हो सकती हूं, और भीतर से मुक्त महसूस करती हूं।"
- निलोफर बैकुल्ला जेल, मुंबई, भारत
"जो भी मैंने अपने जीवन मैं किया वह गलत था। पर अब मैंने एक प्रतिज्ञा ली है की मैं आपराधिक गतिविधियो में लिप्त नहीं होऊंगा।"
-कैदी, बेऊर जेल, बिहार, भारत